संस्थान

वृन्दावन शोध संस्थान में आपका स्वागत है

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वृन्दावन शोध संस्थान की स्थापना हाथरस (उत्तर प्रदेश) में जन्मे स्कूल आफ इण्डियन एण्ड अफ्रीकन स्टडीज, लंदन विश्‍वविद्यालय के प्रवक्ता डा. रामदास गुप्त ने ब्रज क्षेत्र की समय के प्रभाव से नष्ट प्राय होता है। महत्वपूर्ण पाण्डुलिपियाँ एवं कलानिधियों के संग्रह, संरक्षण, शोध व प्रकाशन के उद्‌देद्गय में सन्‌ 1968 की बिहार पंचमी के पुण्य पर्व पर की थी। संस्थान का उद्‌घाटन तत्कालीन प्रखयात विद्वान एवं तत्कालीन केन्द्रीय मन्त्री डा. कर्ण सिंह ने किया था।

ब्रज संस्कृति के संरक्षण व संपोषण हेतु संस्थापित वृन्दावन शोध संस्थान प्रारम्भ में वृन्दावन के लोई बाजार स्थित हाथरस वाली धर्मशाला में डा. रामदास गुप्ता द्वारा व्यक्तिगत आर्थिक संसाधन के द्वारा संचालित हुआ। कालान्तर में इसे भारत सरकार व उत्तर प्रदेशसरकार संस्कृति विभागों से आवर्तक अनावर्तक अनुदान प्राप्त होने लगा। अतएवं सरकार द्वारा प्राप्त आर्थिक सहायता से वृन्दावन शोध संस्थान सन्‌ 1985 में वृन्दावन के रमणरेती क्षेत्रीस्थि दाऊजी की बगीची (सिद्व सन्त ब्रम्हालीन रामकृष्णदास जी पण्डित बाबा की भजन स्थली) स्थित नव निर्मित भवन में स्थानान्तरित हो गया। जहाँ पर ब्रज की घटोदरो के संग्रह संरक्षण एवं ब्रज साहित्य सम्बन्धी ग्रन्थों का प्रकाशन हो रहा है। आयकर अधिनियम की धारा 80-जी से छूट प्राप्त इस संस्थान को सेवाभावी महानुभावों व उदार दानदाताओं का आर्थिक सहयोग भी करन की दिशा में इस संस्थान का महत्वपूर्ण योगदान है।